Monday, August 7, 2017

Ghazal-8

गयी जो तिफ़्ली[1] तो फिर आलम-ए-शबाब[2] आया
गया शबाब तो अब मौसम-ए-ख़िज़ाब आया

मैं शौक़-ए-वस्ल[3] में क्या रेल पर शिताब[4] आया
कि सुबह हिन्द में था, शाम पंज-आब5 आया

कटा था रोज़-ए-मुसीबत ख़ुदा-ख़ुदा करके
ये रात आयी कि सर पे मेरे अज़ाब आया

कहाँ है, दिल को अबस[6] ढूँढते हो पहलू में
तुम्हारे कूचे में मुद्दत से उसको दाब आया

किसी की तेग़-ए-तग़ाफ़ुल[7] का मैं वो कुश्ता[8] हूँ
न जागा, नेज़े[9] पे सौ बार आफ़्ताब[10] आया

नज़र पड़ी न मेरी रौब-ए-हुस्न[11] से रुख़[12] पर
अगरचे[13] सामने मेरे वो बे-नक़ाब आया

हमेशा सूरत-ए-अंजुम[14] खुली रहीं आँखें
फ़िराक़-ए-यार[15] में किस रोज़ मुझको ख़्वाब आया

हुआ यकीं कि ज़मीं पर है आज चाँद-गहन[16]
वो माह[17] चेहरे पे जब डाल कर नक़ाब आया

हुए जो दीदा-ए-गिर्या[18] से अपने अश्क रवाँ[19]
गुमाँ[20] हुआ कि बरसता हुआ सहाब[21] आया

बना तसव्वुर-ए-लैला[22] ब-सूरत-ए-तस्वीर[23]
कभी जो क़ैस[24] की आँखों में शब को ख़्वाब आया

वो ज़ूद-ए-रंज[25] है उसको न छेड़ना 'राना'
मलोगे हाथ अगर बरसर-ए-इताब[26] आया

(1. बचपन; 2. जवानी; 3. मिलन का शौक़; 4. तेज़ी से/झट-पट; 5. पंजाब; 6. बेकार/फ़िज़ूल में; 7. नज़रअंदाज़ करने की आदत रूपी तलवार; 8. क़त्ल किया हुआ/मारा हुआ; 9. सर पे; 10. सूरज का प्रकाश; 11. सुन्दरता का रौब; 12. चेहरा; 13. यद्यपि; 14. सितारों की तरह; 15. प्रियतमा की जुदाई; 16. चन्द्रग्रहण; 17. चाँद; 18. रोती हुई आँखें; 19. बहना/जारी होना; 20. भ्रम/आशंका; 21. बादल; 22. लैला की कल्पना; 23. चेहरे की तस्वीर के साथ; 24. मजनूँ का नाम; 25. जल्दी ग़ुस्सा हो जाने वाला; 26. क़हर)

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