Monday, August 7, 2017

Ghazal-13

किस परी-रू[1] का इंतेज़ार है आज
दिल मेरा सख़्त बे-क़रार है आज

जलवागर[2] मेरा गुल-इज़ार[3] है आज
बुलबुलों बाग़ में बहार है आज

आह की बर्क़[4] कौंध जाती है
अब्र[5] तर, चश्म[6] अश्कबार[7] है आज

तेरे आते ही देख राहत-ए-जाँ[8]
चैन है, सब्र है, क़रार है आज

ध्यान है काकुल-ए-परेशाँ[9] का
इसलिए दिल को इंतेशार[10] है आज

क़त्ल-गह[11] में जो ख़ाक उड़ती है
गर्म-रू[12] कोई शहसवार[13] है आज

कहना क़ासिद[14] कि उसके जीने का
वादा-ए-वस्ल[15] पर मदार[16] है आज

दर्द हो क्यूँ न अपने पहलू[17] में
ग़ैर से यार हम-कनार[18] है आज

हिज्र-ए-गुल-रू[19] में सैर-ए-बाग़[20] कहाँ
निकहत-ए-गुल[21] भी नागवार है आज

अन्दलीबों[22] मक़ाम-ए-नाज़[23] है ये
ग़ैरत-ए-गुल[24] गले का हार है आज

मैं नहीं हिज्र-ए-यार[25] में तन्हा
ग़म-ए-दिलदार[26] ग़मगुसार[27] है आज

ध्यान में किसकी चश्म-ए-मैकूँ[28] के
कहो 'राना' तुम्हें ख़ुमार[29] है आज

(1. परी जैसी शक्ल-ओ-सूरत; 2. दिखाई देना/दर्शन देना; 3. एक फूल का नाम; 4. एक फूल का नाम; 5. बादल; 6. आँखें; 7. आँसुओं से भरी; 8. राहत पहुँचाने वाली; 9. बिगड़ी हुई ज़ुल्फ़ें; 10. घबराहट; 11. जगह जहाँ फाँसी दी जाती है; 12. आकर्षक; 13. घुड़सवार; 14. डाकिया; 15. मिलने का वादा; 16. दार-ओ-मदार; 17. करवट/बग़ल/सीने का साइड का हिस्सा; 18. साथ; 19. प्रियतमा से जुदाई; 20. बाग़ की सैर; 21. फूल की ख़ुशबू; 22. बुलबुल; 23. गर्व की बात; 24. जिसे देखकर फूल शरमा जाएँ; 25. प्रियतमा से जुदाई; 26. प्रियतमा का ग़म; 27. ग़म में हाल-चाल पूछने वाला/हमदर्द; 28. नशीली आँखें; 29. नशा)

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