ऐ अजल[1] हिज्र[2] की शब है तुझे आना होगा
एक दम[3] के लिए तकलीफ़ उठाना होगा
किस सितमगर से पड़े देखिए दिल को पाला
ताइर-ए-जाँ[4] किसी नावक[5] का निशाना होगा
फिर कभी ऐश के दिन, वस्ल की रातें होंगी
या इलाही, कभी ऐसा भी ज़माना होगा?
वादा-ए-वस्ल[6] किया है वो न आएँगे मगर
कुछ न कुछ मौत के आने का बहाना होगा
तर्क-ए-अस्याँ[7] करो 'राना' कि तुम्हें रोज़-ए-जज़ा[8]
देखना नामा-ए-आमाल[9] दिखाना होगा
(1. मौत; 2. जुदाई; 3. क्षण; 4. प्राण रूपी पक्षी; 5. तीर; 6. मुलाक़ात का वादा; 7. गुनाह करने की आदत छोड़ना; 8. हिसाब-किताब वाले दिन/क़यामत के दिन; 9. कर्मों का लेखा-जोखा)
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