घर-घर है अब जहाँ में फ़साना[1] बसंत का
आया बहुत क़रीब ज़माना बसंत का
तेरी हँसी से बज़्म हुई कुश्त-ए-ज़ाफ़रान[2]
याद आ गया जहाँ को फ़साना बसंत का
हूँ सर से पाँव तक मैं तुम्हारे बग़ैर ज़र्द[3]
रंज-ए-फ़िराक़[4] में है बहाना बसंत का
सैर-ए-चमन[5] को आओ तो हम अंदलीब[6] से
सेहरा[7] तुम्हें सुनाएँ शहाना[8] बसंत का
गुल-रू[9] हुआ हूँ मौसम-ए-गुल[10] में तेरे बग़ैर
गुलदस्ता मेरी क़ब्र पे लाना बसंत का
आ जाओ अब भी है कोई दिन मौसम-ए-बहार
शिकवा अगर है तुमको मिटाना बसंत का
बाद-ए-ख़िज़ाँ[11] चली, न रही अब बहार-ए-गुल[12]
फिर देखिए कब आए ज़माना बसंत का
बज़्म-ए-चमन में वज्द[13] है, ग़ुन्चों[14] को गुल को हाल[15]
बुल-बुल सुना रही है तराना[16] बसंत का
मुल्क-ए-चमन[17] में फ़स्ल-ए-बहारी[18] का है उरूज[19]
है गुलशन-ए-जहाँ[20] में ज़माना बसंत का
शबनम[21] शराब-ए-नाब[22] है, साक़ी नसीम[23] है
बुलबुल का क़हक़हा है तराना बसंत का
दिलकश है सुम्बुल[24] और है शबनम भी दिलरुबा
वो मुर्ग़-ए-दिल[25] को दाम[26], ये दाना बसंत का
गुलगश्त-ए-नौ-बहार[27] हो साथ उसके गर नसीब
'राना' को क्यूँ न भाए फिर आना बसंत का
(1. कहानी; 2. ज़ाफ़रान की खेती; 3. पीला; 4. जुदाई का दुःख; 5. बाग़ की सैर; 6. बुलबुल; 7. ख़ुशी के अवसर पर कही जाने वाली शायरी; 8. शाही अंदाज़ का; 9. फूल की तरह/हल्का; 10. फूलों का मौसम; 11. पतझड़ की हवाएँ; 12. फूलों की बहार; 13. तूफ़ान; 14. फूल की कली; 15. आनंद की दशा; 16. गीत; 17. बाग़ रूपी मुल्क; 18. बहार का मौसम; 19. चरम; 20. बाग़ रूपी दुनिया; 21. ओस; 22. शुद्ध शराब; 23. मंद-मंद हवा; 24. एक प्रकार की ख़ुशबूदार घास; 25. दिल रूपी पक्षी; 26. क़ैद/जाल; 27. नयी-नयी बहार के मौसम में सैर)
No comments:
Post a Comment