यार शब-ए-वस्ल[1] ख़फ़ा हो गया
ग़म का यहाँ हश्र[2] बपा[3] हो गया
किस से कहूँ गर्मी-ए-दाग़-ए-फ़िराक़[4]
सीना जहन्नुम से सिवा[5] हो गया
शिकवा-ए-सय्याद[6] न कर अंदलीब[7]
दाम[8] से याँ[9] कौन रिहा हो गया
कौन करे दर्द-ए-जिगर[10] की दवा
हैफ़[11]! मसीहा[12] ही ख़फ़ा हो गया
जान ख़्याल-ए-रुख़-ए-जानाँ[13] में दी
ख़ात्मा बिल-ख़ैर[14] मेरा हो गया
कम मुझे बरज़ख़[15] से नहीं ज़िन्दगी
मौत से आगे[16] ही फ़ना हो गया
वस्ल[17] को तब समझे हुआ जब विसाल[18]
उक़्दा[19] ये हल बाद-ए-फ़ना[20] हो गया
सैद[21] में सब माह[22] से माही[23] तलक
तीर तेरा तीर-ए-क़ज़ा[24] हो गया
काम किया उसकी निगह ने तमाम
मैं हदफ़-ए-तीर-ए-क़ज़ा[25] हो गया
सुनते ही पाज़ेब की झंकार को
क़ब्र में एक हश्र[26] बपा हो गया
वस्ल[27] की हसरत में हुआ है विसाल[28]
दर्द मेरे हक़ में दवा हो गया
तुमने न 'राना' की कभी ली ख़बर
वो इसी हसरत में फ़ना हो गया
(1. मुलाक़ात की रात; 2. क़यामत; 3. टूट पड़ना; 4. जुदाई के दागों की तपिश; 5. बढ़कर/ज़्यादा; 6. शिकारी से शिकायत; 7. बुलबुल; 8. जाल/क़ैद; 9. यहाँ; 10. जिगर का दर्द; 11. आह; 12. मददगार/बचाने वाला; 13. प्रियतमा की सूरत का ख्याल; 14. आखिरकार; 15. दोज़ख़; 16. पहले; 17. मिलन/मुलाक़ात; 18. मौत; 19. पहेली/गुत्थी; 20. मौत के बाद; 21. शिकारी; 22. चाँद; 23. मछली; 24. मौत का तीर; 25. मौत के तीर का निशाना; 26. क़यामत; 27. मुलाक़ात; 28. मृत्यु)
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