Monday, August 7, 2017

50 muntaKhab ash'aar of Mardan Ali Khan 'Rana'





1.     [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-2)] 

मैं शौक़-ए-वस्ल में क्या रेल पर शिताब आया
कि सुबह हिन्द में था, शाम पंज-आब आया

(शौक़-ए-वस्ल - मुलाक़ात की ख़ुशी; शिताब - तेज़ी से/झट-पट; पंज-आब - पंजाब)


2.     [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-26)]

खींचा है अक्स क़ल्ब की "फ़ोटोग्राफ़" में
शीशे में है शबीह, परी कोहक़ाफ़ में 

(अक्स - प्रतिबिम्ब; शबीह - शक्ल; कोहक़ाफ़ - परियों का घर)

3.     [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-2)]

हुआ यकीं कि ज़मीं पर है आज चाँद-गहन
वो माह चेहरे पे जब डाल कर नक़ाब आया

(चाँद-गहन - चन्द्रग्रहण; माह - चाँद)

4.     [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-6)]

हाथों में नाज़ुकी से सँभलती नहीं जो तेग़
है इसमें क्या गुनाह तेरे जाँ-निसार का

(तेग़ - तलवार)

5.     [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-11)]

तुमको दीवाने अगर हम से हज़ारों हैं तो ख़ैर
हम भी कर लेंगे कोई तुम सा परी-रू पैदा

(परी-रू - परी जैसी शक्ल-ओ-सूरत वाली)

6.     [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-13)]

तेरे आते ही देख राहत-ए-जाँ
चैन है, सब्र है, क़रार है आज

7.     [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-14)]

कहना क़ासिद कि उसके जीने का
वादा-ए-वस्ल पर मदार है आज

(क़ासिद - डाकिया; मदार - निर्भरता)

8.     [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-20)]

ख़ुद ग़लत है जो कहे होती है तक़दीर ग़लत
कहीं क़िस्मत की भी हो सकती है तहरीर ग़लत

(तहरीर - लिखा हुआ)

9.     [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-29)]

बदन में ज़ख़्म नहीं बद्धियाँ हैं फूलों की
हम अपने दिल में इसी को बहार जानते हैं

(बद्धियाँ - चोट के निशान)

10.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-31)]

ख़ुदारा बहर-ए-इस्तक़बाल जल्द ऐ जान बाहर आ
अयादत को मेरी जान-ए-जहाँ तशरीफ़ लाते हैं

(ख़ुदारा - ख़ुदा के लिए; बहर-ए-इस्तक़बाल - स्वागत के लिए; अयादत - हाल-चाल पूछने को)

11.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-32)]

ग़म सिवा इश्क़ का मआल नहीं
कौन दिल है जो पाएमाल नहीं

(मआल - अंजाम; पाएमाल - उजड़ा हुआ)

12.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-37)]

ना-उमीद एहल-ए-ख़राबात नहीं रहमत से
बख़्श देगा वो करीम अपने गुनाहगारों को

(एहल-ए-ख़राबात - बुरी आदतों वाले लोग; रहमत - कृपा; करीम - कृपा करने वाला)

13.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-37)]

अबरू आँचल में दुपट्टे के छुपाना है बजा
तुर्क क्या म्यान में रखते नहीं तलवारों को

(अबरू - भौहें; बजा - उचित; तुर्क - सिपाही)

14.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-40)]

उठाया उसने बीड़ा क़त्ल का कुछ दिल में ठाना है
चबाना पान का भी खूँ बहाने का बहाना है

(खूँ - ख़ून)

15.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-40)]

हमारे मर्ग पे शादी अबस अग्यार करते हैं
जहाँ से रफ़्ता-रफ़्ता एक दिन उनको भी जाना है

(मर्ग - मौत; शादी - ख़ुशी; अबस - व्यर्थ ही/फ़िज़ूल में; अग्यार - ग़ैर लोग/विरोधी; जहाँ - दुनिया)

16.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-41)]

दर्द-ए-सर है तेरी सब पंद-ओ-नसीहत नासेह
छोड़ दे मुझको ख़ुदा पर, न कर अब सर ख़ाली

(पंद-ओ-नसीहत - नसीहतें; नासेह - नसीहत करने वाला/समझाने वाला)

17.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-41)]

जिसको देखो वो नूर का बक़अ
ये परिस्तान है कि लंदन है

(बक़अ - घर)

18.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-41)]

रस्म उल्टी है ख़ूब-रूयों की
दोस्त जिसके बनो वो दुश्मन है

(ख़ूब-रूयों - ख़ूबसूरत लोग)

19.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-43)]

दिल को लगाऊँ और से मैं तुमको छोड़ दूँ
फ़िक़रा है ये रक़ीब का और झूठ बात है

(फ़िक़रा - धोखा; रक़ीब - विरोधी)

20.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-44)]

हिज्र-ए-जानाँ में जी से जाना है
बस यही मौत का बहाना है

(हिज्र-ए-जानाँ - प्रियतमा से जुदाई)

21.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-46)]

हो गिरेबाँ का चाक ख़ाक रफ़ू
तार हाथ आए जब न दामन से

22.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-46)]

न निकली हसरत-ए-दिल एक भी हज़ार अफ़सोस
अदम से आए थे क्या-क्या हम आरज़ू करते

(अदम - non existance)

23.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-46)]

हर दम दम-ए-आख़िर है, अजल सर पे खड़ी है
दम भर भी हम इस दम का भरोसा नहीं करते

(अजल - मौत)

24.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-47)]

फ़ुर्क़त की रात वस्ल की शब का मज़ा मिला
पहरों ख़्याल-ए-यार से बातें किया किए

25.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-48)]

तुम हो मुझसे हज़ार मुस्तग़नी
दिल नहीं मेरा यार मुस्तग़नी

(मुस्तग़नी - बेपरवाह)

26.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-52)]

ले क़ज़ा एहसान तुझपर कर चले
हम तेरे आने से पहले मर चले

27.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-55)]

ये रक़ीबों की है सुख़न-साज़ी
बे-वफ़ा आप हों, ख़ुदा न करे

(सुख़न-साज़ी - बातें बनाना)

28.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-58)]

दुनिया में कोई इश्क़ से बदतर नहीं है चीज़
दिल अपना मुफ़्त दीजिए, फिर जी से जाइए

29.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-59)]

हरदम ये दुआ माँगते रहते हैं ख़ुदा से
अल्लाह बचाए शब-ए-फ़ुर्क़त की बला से

30.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-61)]

हरजाईयों के इश्क़ ने क्या-क्या किया ज़लील
रुस्वा रहे, ख़राब रहे, दर-ब-दर रहे

31.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-62)]

पड़ा हूँ मैं यहाँ और दिल वहीँ है
इलाही! मैं कहीं हूँ, वो कहीं है

32.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-62)]

बदन पर बार है फूलों का साया
मेरा महबूब ऐसा नाज़नीं है

33.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-63)]

क्यूँकर बढ़ाऊँ रब्त न दरबान-ए-यार से
आख़िर कोई तो मिलने की तदबीर चाहिए

34.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-65)]

लबों पे जान है, एक दम का और मेहमाँ है
मरीज़-ए-इश्क़-ओ-मुहब्बत का तेरे हाल ये है

35.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-65)]

जो चीज़ है जहान में वो बेमिसाल है
हर फ़र्द-ए-ख़ल्क़ वहदत-ए-हक़ पर दलील है

36.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-67)]

राह-ए-उल्फ़त में मुलाक़ात हुई किस-किस से
दश्त में कैस मिला, कोह में फ़रहाद मुझे

37.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-68)]

मरज़-ए-इश्क़ को शिफ़ा समझे
दर्द को दर्द की दवा समझे

38.  [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-68)]

दिया वो जो न था वहम-ओ-गुमाँ में
भला मैं और क्या मांगूँ ख़ुदा से

39.   [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-69)]

जिसको सब कहते हैं समंदर है
क़तरा-ए-अश्क-ए-दीदा-ए-तर है

40.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-72)]

प्यार की बातें कीजे साहब
लुत्फ़ सोहबत का गुफ़्तगू से है

41.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-72)]

न पूछो हम-सफ़रो मुझसे माजरा-ए-वतन
वतन है मुझपे फ़िदा और मैं फ़िदा-ए-वतन

42.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-73)]

आख़िर हुआ है हश्र बपा इंतेज़ार में
सुबह-ए-शब-ए-फ़िराक़ हुई मारवाड़ में


43.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-73)]

की रिया से न शेख़ ने तौबा
मर गया वो गुनाहगार अफ़सोस

44.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-74)]

ख़ाक भी लुत्फ़-ए-ज़िन्दगी न रहा
आरज़ू जी में हो वो जी न रहा

45.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-74)]

न आयी बात तक भी मुँह पे रौब-ए-हुस्न-ए-जानाँ से
हज़ारों सोच कर मज़मून हम दरबार में आए

46.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-74)]

खो गया कू-ए-दिलरुबा में 'निज़ाम'
लोग कहते हैं मारवाड़ में है

47.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-74)]

रेल पर यार आएगा शायद
मिज़्दा-ए-वस्ल आज तार में है

(मिज़्दा-ए-वस्ल - मुलाक़ात की ख़ुशख़बरी; तार - टेलीग्राम)

48.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-74)]

अश्क-ए-हसरत दीदा-ए-दिल से हैं जारी इन दिनों
कार-ए-तूफाँ कर रही है अश्क-बारी इन दिनों

49.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-75)]

दीवार-ए-तन को देख के 'राना' यकीं हुआ
बस दरमियाँ यही है अदम और वजूद में

50.    [कुल्लियात-ए-निज़ाम (पेज-75)]

माल-ए-दुनिया को न मुतलक़ जाना
ख़ूब मरदान अली खाँ समझे


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