Monday, August 7, 2017

Ghazal-20

नाम मशहूर-ए-ख़ास-ओ-आम[1] हुआ
इश्क़ में ख़ूब मेरा नाम हुआ

दिल में अब दर्द का मक़ाम हुआ
हिज्र[2] में काम ही तमाम हुआ

पुख़्ता-मग़ज़ों[3] पे तोहमत[4] ऐ नासेह[5]
आपको क्या ख़्याल-ए-ख़ाम[6] हुआ

ख़त ग़ुलामी का लीजिए साहब
बोसा-ए-ख़त[7] पे मैं ग़ुलाम हुआ

चौंक उठे ख़फ़्तगान-ए-ख़्वाब-ए-अदम[8]
जब ख़िरामाँ[9] वो ख़ुश-ख़िराम[10] हुआ

हिज्र में दम निकल गया 'राना'
लो ये क़िस्सा ही अब तमाम हुआ

(1. आम और ख़ास लोगों में मशहूर; 2. जुदाई; 3. समझदार लोग; 4. इल्ज़ाम; 5. समझाने वाला/नसीहत करने वाला; 6. ग़लत ख्याल; 7. गाल पर बोसा; 8. गहरी नींद में ख़्वाब में डूबे हुए; 9. टहलना; 10. ख़ूबसूरत चाल वाला)

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