Monday, August 7, 2017

Ghazal-22

आम अगर सिलसिला-ए-ज़ुल्फ़-ए-मअनबर[1] होता
फिर न ख़ाली कभी सौदे[2] से कोई सर होता

कोई आशिक़ भी न इस इश्क़ से जाँ-बर[3] होता
तुझ सा बे-रहम ज़माने में जो दिलबर होता

ऐ बुत-ए-पर्दा-नशीं[4] शोहरा-ए-आफ़ा[5] है तू
क्यूँ तेरे हुस्न का मज़कूर[6] न घर-घर होता

हिज्र-ए-महबूब[7] में क्या-क्या न अज़ीयत[8] खींची
मौत आ जाती तो इस ज़ीस्त[9] से बेहतर होता

देखता सूरत-ए-आईना[10] जो उसका न जमाल[11]
शश-जिहत[12] में न कभी आके मैं शशदर[13] होता

रहम आया न उसे वरना मेरे नालों[14] से
पानी हो जाता वहीँ कैसा ही पत्थर होता

देख ले ज़ुल्फ़-ए-परी-रू[15] को तो क़ायल[16] हो जाए
जो ये समझा है परी के नहीं शहपर[17] होता

नौ-गिरफ़्तार-ए-ग़म-ए-हिज्र[18] ने दी जाँ आख़िर
क्यूँ ये मरता जो ग़म-ओ-दर्द[19] का ख़ू-गर[20] होता

मेरे मरने की ख़बर सुनके कहा जानाँ[21] ने
मरज़-ए-इश्क़[22] से कोई नहीं जाँ-बर[23] होता

कोहकन[24] कोहकनी[25] जाके न करता हरगिज़
हक़ में उसके दिल-ए-शीरीं[26] जो न पत्थर होता

मोतियों का है जबीं[27] पर तेरी छपका[28] इस तरह
जिस तरह माह[29] है परवीं[30] के बराबर होता

कुछ बसर और भी अरमानों में कर लेते 'निज़ाम'
उम्र भर में भी अगर वस्ल[31] मयस्सर[32] होता

(1. ख़ुशबूदार ज़ुल्फ़ों का सिलसिला; 2. पागलपन; 3. सलामत/ज़िन्दा; 4. पर्दानशीन प्रियतमा; 5. दुनिया भर में मशहूर; 6. ज़िक्र; 7. प्रियतमा से जुदाई; 8. दुःख/तकलीफ़; 9. ज़िन्दगी; 10. आईने की तरह; 11. सौन्दर्य; 12. छः पहलुओं वाला/षटकोण की सी आकृति का (शीशे का कमरा); 13. हैरान/दुविधा में; 14. विलाप; 15. परी जैसी की ज़ुल्फ़ें; 16. प्रभावित; 17. पंख; 18. जुदाई के ग़म का नया-नया मारा हुआ; 19. ग़म और दर्द; 20. आदी; 21. प्रियतमा; 22. इश्क़ की बीमारी; 23. महफ़ूज़/सलामत/ज़िन्दा; 24. पहाड़ खोदने वाला/'फ़रहाद'; 25. पहाड़ खोदना; 26. 'शीरीं' का दिल; 27. माथा/पेशानी; 28. माथे पे डाला जाने वाला गोल आकार का एक गहना; 29. चाँद; 30. सात सितारों का झुरमुट; 31. मिलन/मुलाक़ात; 32. उपलब्ध/आसानी से मिलना)

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